लोकप्रिय पोस्ट

सोमवार, 24 सितंबर 2018

rashi ratn

💯%असली राशि रत्न💎लेब टेस्टेड🔬,रुद्राक्ष,📿माला,🔯यंत्र,
🛡️कवच,🐴घोड़े की नाल,🚩वास्तु सामग्री
🥇☑️सर्टिफिकेट वस्तु  उचित दर💰में उपलब्ध👍

💎रत्न को नकली साबित करने वाले को 💰51 हजार रुपए का नगद ईनाम 👍

नोट:- ⚛️जन्मकुंडली ✍️बनवाने के लिए संपर्क करे👍
                     
                   
               📞संपर्क सूत्र:- 9462012134
💯%असली राशि रत्न💎लेब टेस्टेड🔬,रुद्राक्ष,📿माला,🔯यंत्र,
🛡️कवच,🐴घोड़े की नाल,🚩वास्तु सामग्री
🥇☑️सर्टिफिकेट वस्तु  उचित दर💰में उपलब्ध👍

💎रत्न को नकली साबित करने वाले को 💰51 हजार रुपए का नगद ईनाम 👍

नोट:- ⚛️जन्मकुंडली ✍️बनवाने के लिए संपर्क करे👍










                     
                   
               📞संपर्क सूत्र:- 9462012134

बुरी नज़र उतारने के टोटके

जय माता दी
जय शमशान भैरव

                 बुरी नज़र उतारने के टोटके


आज सभी जगह देखने को मिला है कि किसी भी हिन्दू  महिला के  छोटे बचे की हालत बिगड़ जाए तो वो उसे लेकर मजीद कर बाहर  चली जाती है और वहां भिखारियों की तरह खड़ी रहते। पर हमारे धर्म से जो सीके है उनके। यह क्यों हात फेलाना तो  इसके टोटके जो सिद्ध होए हुवे है उसे अपनाए
1  जिस बचे की तबियत खराब है उसको गर के मेंन गेट के यहां  उसको लेकर उसके ऊपर पीली सरशो   नमक  लाल मिर्च आकि वाली लेकर 21 बार उतारे ओर हर एक उतारे के सात  ॐ हनुमते कष्ट हराये फट स्वहा ।।। बोलना है और उस सभी सामग्री को  जलती हुहि अग्नि में ॐ फट जोर से बोलकर उसमे डाले  और। जैसे ही वो सामग्री जली ओर आपका  बचा  बिल्कुल सही

2।। साम को 6  से 7,15  सात के बीच  मेंन गेट के यहां  एक तो नारियल 5  रुपये की सिंदूर  अगरबती लेकर  उसके ऊपर वारे  ओर हनुमानजी के मंदिर में हनुमानजी के पीछे रख दे

3।।बचे को मेंन दरवाजे पर खड़ा कर या उसको वहां पर  लेकर उसके ऊपर गंगा जल या पानी का  छिड़काव करें उसके बाद उसके सिर पर अक। नीबू काटे उसको इस तरह फेके की जैसे नीबू को जोड़े तो वो जुड़े नही अर्थात उल्टा कर के। फेंके ऐसे ही 5 नीबू काटने है और दरवाजे जे यह काली सिगरेट  जलाके रख दे और नीबू काटते समय ॐ श्मशानी भैरव नमः  ये मन्त्र बोले

तिलक वशीकरण

"जय माता दी"

        ★सफेद आक के पौधे से तिलक वशीकरण★  

रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र का सहयोग होने पर इस पौधे की जड़ ले आए गाय का घी गोरोचन के साथ इस जल को मिलाकर लेप बनाए तथा माथे पर तिलक लगावे इस तिलक को लगाने वाले के प्रभाव में लोग तो क्या
त्रिलोक भी आ जाता है तथा सर्वजन वशीकरण होता है |
         
             🕎🕉️🚩जय माता दी🚩🕉️🕎
                                  🔘
                             👁️♈👁️
                                  👅
           ☠️🚩जय शमशान भैरव👹🚩☠️

किसी भी बड़ी समस्या के समाधान के लिए
🌞सुबह 🕙10:00 बजे से 🕒3:00 बजे तक व
⛅सांयकाल 🕕6:00 बजे से 🕘9:00 बजे तक
समय लेकर📞 सम्पर्क करे.👍
📞 94620-12134

✍️ #ज्योतिष, ☠️ #तन्त्र, 🕉️ #मंत्र, 🔯 #यंत्र विद्या के द्वारा
किसी भी समस्या का समाधान कर इनसे निजात पाया जा सकता है
जरुरत है सही तरीके से समाधान करने की
आप भी अपनी सभी परेशानियों से निजात पाकर अपना जीवन खुशियो से भरे😀😀😀

#हर तरफ से 😢निराश प्रेमी प्रेमिका अवश्य 📞सम्पर्क करें👍

नोट:- ⚛️जन्मकुंडली ✍️बनवाने के लिए संपर्क करे👍

💯%असली राशि रत्न💎लेब टेस्टेड🔬,रुद्राक्ष,📿माला,🔯यंत्र,
🛡️कवच,🐴घोड़े की नाल,🚩वास्तु सामग्री
🥇☑️सर्टिफिकेट वस्तु  उचित दर💰में उपलब्ध👍

💎रत्न को नकली साबित करने वाले को 💰51 हजार रुपए का नगद ईनाम 👍
                   
                        🔱कालिका ज्योतिष🔱
               📞संपर्क सूत्र:- 9462012134

संतान प्राप्ति का तांत्रिक उपाय

संतान प्राप्ति का तांत्रिक उपाय

आज के वैज्ञानिक युग में जहां विज्ञान संतानोत्पत्ति के लिए किराए की कोख व टेस्ट ट्यूब बेबी प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहा है वहीं प्राचीन भारतीय संस्कृति के यंत्र तंत्र मंत्र आज भी उतने ही कारगर हैं जितने कि पहले होते थे।
मंत्र: ऊँ ह्रां ह्रीं हू्रं पुत्रं कुरु कुरु स्वाहा



इस षोडशाक्षर मंत्र का ध्यान, न्यास आदि नहीं है। वसंत ऋतु से प्रारंभ करके दस हजार जप आम के वृक्ष पर चढ़कर करें। मंत्र जप से पहले स्नान, नित्यकर्मादि कर लेने चाहिए। यह प्रयोग करने के दो माह या दो ऋतुकाल होने पर भी गर्भस्थिति न हो तो फिर से करना चाहिए।

मृतवत्सा यंत्र: यह यंत्र रवि-पुष्य, गुरु-पुष्य, सर्वार्थसिद्धि अमृतसिद्धि योगों में अनार की कलम से गोरोचन से भोजपत्र पर लिखकर गुग्गुल की धूनी देकर स्त्री गर्भवती स्थिति में या वैसे ही गले में धारण कर लें। यह यंत्र सोने, चांदी या तांबे के ताबीज में रखकर पहना जा सकता है। लिखने के बाद इसे कुछ समय तक एकाग्र मन से श्रद्धा भक्ति पूर्वक देखते रहना चाहिए। वंध्या निवारक यंत्र को धारण करने से स्त्री गर्भवती होती है इस यंत्र को अनार की कलम और अष्टगंध की स्याही से भोज पत्र पर किसी शुभ मुहूर्त में पवित्रतापूर्वक अत्यंत धैर्य से 108 बार लिखें। इनकी पंचोपचार पूजा करें। और पुत्र की कामना कर अपने इष्ट देव के इष्ट मंत्र की एक माला जप करें। यह क्रम लगातार 30 दिन अर्थात एक माह तक चलता रहे। पहला दिन पहला यंत्र लिख कर एक विशेष प्रकार से रखें जिससे उसकी पहचान हो जाए। इस तरह 3241 यंत्र तैयार हो जाएंगे। अंतिम दिन सभी यंत्रों की पूजा करें। इष्ट मंत्र का 3240 बार जप करें। 3240 मंत्र हवन करें। 324 मंत्र तर्पण करें। 3 मंत्र मार्जन करें और ब्राह्मण को भोजन कराएं । उसके बाद पहले दिन यंत्र को तांबे के यंत्र या लाल वस्त्र में लपेट कर गले में धारण करें। यंत्र इस प्रकार लगा रहे कि गर्भाशय से स्पर्श करता हो। शेष 3240 यंत्र आटे में गूंध कर गोलियां बना लें और उन्हें जल में विसर्जन कर दें। यदि जलाशय नहीं हो तो पीपल के जड़ में रख दें। अगर किसी स्त्री का गर्भपात हो जाता हो तो यंत्रको धारण करें। किसी रवि-मूल योग में इस यंत्र को अष्टगंध की स्याही और अनार की कलम से भोजपत्र पर लिखें।

"जय माता दी"
         
             🕎🕉️🚩जय माता दी🚩🕉️🕎
                                  🔘
                             👁️♈👁️
                                  👅
           ☠️🚩जय शमशान भैरव👹🚩☠️

किसी भी बड़ी समस्या के समाधान के लिए
🌞सुबह 🕙10:00 बजे से 🕒3:00 बजे तक व
⛅सांयकाल 🕕6:00 बजे से 🕘9:00 बजे तक
समय लेकर📞 सम्पर्क करे.👍
📞 94620-12134

✍️ #ज्योतिष, ☠️ #तन्त्र, 🕉️ #मंत्र, 🔯 #यंत्र विद्या के द्वारा
किसी भी समस्या का समाधान कर इनसे निजात पाया जा सकता है
जरुरत है सही तरीके से समाधान करने की
आप भी अपनी सभी परेशानियों से निजात पाकर अपना जीवन खुशियो से भरे😀😀😀

#हर तरफ से 😢निराश प्रेमी प्रेमिका अवश्य 📞सम्पर्क करें👍

नोट:- ⚛️जन्मकुंडली ✍️बनवाने के लिए संपर्क करे👍

💯%असली राशि रत्न💎लेब टेस्टेड🔬,रुद्राक्ष,📿माला,🔯यंत्र,
🛡️कवच,🐴घोड़े की नाल,🚩वास्तु सामग्री
🥇☑️सर्टिफिकेट वस्तु  उचित दर💰में उपलब्ध👍

💎रत्न को नकली साबित करने वाले को 💰51 हजार रुपए का नगद ईनाम 👍
                   
                        🔱कालिका ज्योतिष🔱
               📞संपर्क सूत्र:- 9462012134

रोग जाड़ने का अघोर शाबर मन्त्र


रोग जाड़ने का अघोर शाबर मन्त्र


“ॐ नमो आदेश गुरु । घोर-घोर, काजी की कुरान घोर, मुल्ला की बांग घोर, रेगर की कुण्ड घोर, धोबी की चूण्ड घोर, पीपल का पान घोर, देव की दीवाल घोर । आपकी घोर बिखेरता चल, पर की घोर बैठाता चल । वज्र का कीवाड़ जोड़ता चल, सार का कीवाड़ तोड़ता चल । कुण-कुण को बन्द करता चल-भूत को, पलीत को, देव को, दानव को, दुष्ट को, मुष्ठ को, चोट को, फेट को, मेले को, धरले को, उलके को, बुलके को, हिड़के को, भिड़के को, ओपरी को, पराई को, भूतनी को, डंकनी को, सियारी को, भूचरी को, खेचरी को, कलुवे को, मलवे को, उन को, मतवाय को, ताप को, पीड़ा को, साँस को, काँस को, मरे को, मुसाण को । कुण-कुण-सा मुसाण – काचिया मुसाण, भुकिया मुसाण, कीटिया मुसाण, चीड़ी चोपड़ा का मुसाण, नुहिया मुसाण – इन्हीं को बन्ध कर, ऐड़ो की ऐड़ी बन्द कर, जाँघ की जाड़ी बन्द कर, कटि की कड़ी बन्द कर, पेट की पीड़ा बन्द कर, छाती को शूल बन्द कर, सर की सीस बन्द कर, चोटी की चोटी बन्द कर । नौ नाड़ी, बहत्तर रोम-रोम में, घर-पिण्ड में दखल कर । देश बंगाल का मनसा राम सेबड़ा आकर मेरा काम सिद्ध न करे, तो गुरु उस्ताद से लाजे । शब्द सांचा, पिण्ड काचा, फुरो मन्त्र , ईश्वरो वाचा ।”

विधि व फलः-

रविवार के दिन सायं-काल भगवान् शिव के मन्दिर में जाकर सुगन्धित तेल का दीपक जलाकर लोबान-गूगल का धूप करें और नैवेद्य अर्पित करें । किसी धूणे या शिव-मन्दिर के साधु को गाँजे या तम्बाकू से भरी एक चिलम भेंट करें । तदुपरान्त मन्त्र का २७ बार जप करे । यह जप २७ दिनों तक नियमित रुप से करना चाहिए । फिर आवश्यकता पड़ने पर अर्थात् मन्त्र में वर्णित कोई रोग-बाधा दूर करने हेतु पीड़ित व्यक्ति को लोहे की छुरी या मोर-पंख से सात बार मन्त्र पढ़ते हुए झाड़ना चाहिए । इससे रोगी का रोग शान्त होता है । यह क्रिया तीन दिन तक प्रातः और सायं-काल करने से रोगी पूर्ण स्वस्थ हो जाता है ।

"जय माता दी"
           
             🕎🕉️🚩जय माता दी🚩🕉️🕎
                                  🔘
                             👁️♈👁️
                                  👅
           ☠️🚩जय शमशान भैरव👹🚩☠️

किसी भी बड़ी समस्या के समाधान के लिए
🌞सुबह 🕙10:00 बजे से 🕒3:00 बजे तक व
⛅सांयकाल 🕕6:00 बजे से 🕘9:00 बजे तक
समय लेकर📞 सम्पर्क करे.👍
📞 94620-12134

✍️ #ज्योतिष, ☠️ #तन्त्र, 🕉️ #मंत्र, 🔯 #यंत्र विद्या के द्वारा
किसी भी समस्या का समाधान कर इनसे निजात पाया जा सकता है
जरुरत है सही तरीके से समाधान करने की
आप भी अपनी सभी परेशानियों से निजात पाकर अपना जीवन खुशियो से भरे😀😀😀

#हर तरफ से 😢निराश प्रेमी प्रेमिका अवश्य 📞सम्पर्क करें👍

नोट:- ⚛️जन्मकुंडली ✍️बनवाने के लिए संपर्क करे👍

💯%असली राशि रत्न💎लेब टेस्टेड🔬,रुद्राक्ष,📿माला,🔯यंत्र,
🛡️कवच,🐴घोड़े की नाल,🚩वास्तु सामग्री
🥇☑️सर्टिफिकेट वस्तु  उचित दर💰में उपलब्ध👍

💎रत्न को नकली साबित करने वाले को 💰51 हजार रुपए का नगद ईनाम 👍
                     
                        🔱कालिका ज्योतिष🔱
               📞संपर्क सूत्र:- 9462012134

रात्रि में बजरंग बाण पाठ करने की विधि जो तंत्र कार्य करती है

रात्रि में बजरंग बाण पाठ करने की विधि जो तंत्र कार्य करती है:-
आज के समय में हर मनुष्य किसी न किसी परेशानी से घिरा हुआ है | हर समाधान के बाद भी उसे कोई हल नही मिलता | पूजा -पाठ करने के बाद भी अभिष्ठ फल की प्राप्ति नही हो पाती है | पूजा – पाठ की भी एक विधि होती है अगर पूजा-पाठ विधि अनुसार नही की जाती है तो उसका फल आपको मिलता तो है किन्तु बहुत प्रयत्न के बाद मिलता है |

आज हम आपको हनुमान जी के बजरंग बाण के रात्रि में किये जाने वाले पाठ के विषय में बता रहे है | वैसे तो बजरंग बाण का नियमित रूप से पाठ आपको हर संकट से दूर रखता है | किन्तु अगर रात्रि में बजरंग बाण को इस प्रकार से सिद्ध किया जाये तो इसके चमत्कारी प्रभाव तुरंत ही आपके सामने आने लगते है | अगर आप चाहते है अपने शत्रु को परास्त करना या फिर व्यापर में उन्नति या किसी भी प्रकार के अटके हुए कार्य में पूर्णता तो रात्रि में बजरंग बाण पाठ को अवश्य करें |

विधि इस प्रकार है : –
किसी भी मंगलवार को रात्रि का 11 से रात्रि 1 बजे तक का समय सुनिश्चित कर ले | बजरंग बाण का पाठ आपको 11 से रात्रि 1 तक करना है | सबसे पहले आप एक चौकी को पूर्व दिशा की तरफ स्थापित करें अब इस चौकी पर एक पीला कपडा बिछा दे | अब आप इस मंत्र को एक कागज पर लिख कर इसे फोल्ड करके इस चौकी पर रख दे | मंत्र इस प्रकार है : “ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ” ||


अब आप चौकी के दायें तरफ एक मिटटी के दिए में घी का दीपक जला दे | आपको इस चौकी के सामने आसन पर बैठ जाना है | इस प्रकार आपका मुख पूर्व दिशा कर तरफ हो जायेगा और दीपक आपके बाएं तरफ होगा | अब आप परमपिता परमेश्वर का ध्यान करते हुए इस प्रकार बोले : – हे परमपिता परमेश्वर मै(अपना नाम बोले ) गोत्र (अपना गोत्र बोले ) आपकी कृपा से बजरंग बाण का यह पाठ कर रहा हु इसमें मुझे पूर्णता प्रदान करें | अब आप ठीक 11 बजते ही इस मंत्र का जाप शुरू कर दे ” ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ” इस मंत्र को आप 5 मिनट तक जाप करें, ध्यान रहे मंत्र में जहाँ पर फट शब्द आता है वहा आप फट बोलने के साथ -साथ  2 उँगलियों से दुसरे हाथ की हथेली पर ताली बजानी है |

अब आप 11 बजकर 5 मिनट से और रात्रि 1 बजे तक लगातार बजरंग बाण का पाठ करना प्रारंभ कर दे | ध्यान रहे बजरंग बाण पाठ आपको याद होना चाहिए | किताब से पढ़कर बिलकुल न करें |  जैसे ही 1 बजता है आप बजरंग बाण के पाठ को पूरा कर अब आप फिर से इस मंत्र ” ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ” का जाप 5 मिनट तक करें | अब आप कागज  पर   लिखे हुए मंत्र को जला दे | इस प्रकार आपका यह बजरंग बाण का पाठ एक ही रात्रि में सिद्ध हो जाता है |

"जय माता दी"
         
             🕎🕉️🚩जय माता दी🚩🕉️🕎
                                  🔘
                             👁️♈👁️
                                  👅
           ☠️🚩जय शमशान भैरव👹🚩☠️

किसी भी बड़ी समस्या के समाधान के लिए
🌞सुबह 🕙10:00 बजे से 🕒3:00 बजे तक व
⛅सांयकाल 🕕6:00 बजे से 🕘9:00 बजे तक
समय लेकर📞 सम्पर्क करे.👍
📞 94620-12134

✍️ #ज्योतिष, ☠️ #तन्त्र, 🕉️ #मंत्र, 🔯 #यंत्र विद्या के द्वारा
किसी भी समस्या का समाधान कर इनसे निजात पाया जा सकता है
जरुरत है सही तरीके से समाधान करने की
आप भी अपनी सभी परेशानियों से निजात पाकर अपना जीवन खुशियो से भरे😀😀😀

#हर तरफ से 😢निराश प्रेमी प्रेमिका अवश्य 📞सम्पर्क करें👍

नोट:- ⚛️जन्मकुंडली ✍️बनवाने के लिए संपर्क करे👍

💯%असली राशि रत्न💎लेब टेस्टेड🔬,रुद्राक्ष,📿माला,🔯यंत्र,
🛡️कवच,🐴घोड़े की नाल,🚩वास्तु सामग्री
🥇☑️सर्टिफिकेट वस्तु  उचित दर💰में उपलब्ध👍

💎रत्न को नकली साबित करने वाले को 💰51 हजार रुपए का नगद ईनाम 👍
                   
                        🔱कालिका ज्योतिष🔱
               📞संपर्क सूत्र:- 9462012134

गुरुवार, 5 अप्रैल 2018

💀💀💀तांत्रिक साधना💀💀💀



💀💀💀: तांत्रिक साधना दो प्रकार की होती है- एक वाम मार्गी तथा दूसरी दक्षिण मार्गी. वाम मार्गी साधना बेहद कठिन है. वाम मार्गी तंत्र साधना में छह प्रकार के कर्म बताये गये हैं, जिन्हें षट कर्म कहते हैं.
                                                                                                                                                                                                                                                                        शांति, वक्ष्य, स्तम्भनानि, विद्वेषणोच्चाटने तथा.
गोरणों तनिसति षट कर्माणि                                                                                  
  अर्थात शांति कर्म, वशीकरण, स्तंभन, विद्वेषण, उच्चाटन, मारण. ये छह तांत्रिक षट कर्म बताये गये हैं. 
इनके अलावा नौ प्रयोगों का वर्णन भी है :
                                                                                                                                मारण मोहनं स्तम्भनं विद्वेषोच्चाटनं वशम्.
आकर्षण यिक्षणी चारसासनं कर त्रिया तथा॥

मारण, मोहनं, स्तंभनं, विद्वेषण, उच्चाटन, वशीकरण, आकर्षण, यिक्षणी साधना, रसायन क्रिया तंत्र के ये नौ प्रयोग हैं.

रोग कृत्वा गृहादीनां निराण शिन्तर किता.
विश्वं जानानां सर्वेषां निधयेत्व मुदीरिताम्॥
पूधृत्तरोध सर्वेषां स्तम्भं समुदाय हृतम्.
स्निग्धाना द्वेष जननं मित्र, विद्वेषण मतत॥
प्राणिनाम प्राणं हरपां मरण समुदाहृमत्.

जिससे रोग, कुकृत्य और ग्रह आदि की शांति होती है, उसको शांति कर्म कहा जाता है और जिस कर्म से सब प्राणियों को वश में किया जाये, उसको वशीकरण प्रयोग कहते हैं तथा जिससे प्राणियों की प्रवृत्ति रोक दी जाए, उसको स्तंभन कहते हैं तथा दो प्राणियों की परस्पर प्रीति को छुड़ा देने वाला नाम विद्वेषण है और जिस कर्म से किसी प्राणी को देश आदि से पृथक कर दिया जाए, उसको उच्चाटन प्रयोग कहते हैं तथा जिस कर्म से प्राण हरण किया जाए, उसको मारण कर्म कहते हैं.

* मंत्र साधना : मंत्र साधना भी कई प्रकार की होती है. मंत्र से किसी देवी या देवता को साधा जाता है और मंत्र से किसी भूत या पिशाच को भी साधा जाता है. मंत्र का अर्थ है मन को एक तंत्र में लाना. मन जब मंत्र के अधीन हो जाता है तब वह सिद्ध होने लगता है. मंत्र साधना भौतिक बाधाओं का आध्यात्मिक उपचार है.
* मुख्यत: तीन प्रकार के मंत्र होते हैं- 1. वैदिक मंत्र  2. तांत्रिक मंत्र और 3. शाबर मंत्र.
* मंत्र जप के भेद- 1. वाचिक जप, 2. मानस जप और 3. उपाशु जप.
वाचिक जप में ऊंचे स्वर में स्पष्ट शब्दों में मंत्र का उच्चारण किया जाता है. मानस जप का अर्थ है मन ही मन जप करना. उपांशु जप में जप करने वाले की जीभ या ओष्ठ हिलते हुए दिखाई देते हैं लेकिन आवाज नहीं सुनायी देती. बिल्कुल धीमी गति में जप करना ही उपांशु जप है.

* मंत्र नियम : मंत्र-साधना में विशेष ध्यान देने वाली बात है- मंत्र का सही उच्चारण. दूसरी बात जिस मंत्र का जप अथवा अनुष्ठान करना है, उसका अर्घ पहले से लेना चाहिए. मंत्र सिद्धि के लिए आवश्यक है कि मंत्र को गुप्त रखा जाये. प्रतिदिन के जप से ही सिद्धि होती है.
किसी विशिष्ट सिद्धि के लिए सूर्य अथवा चंद्रग्रहण के समय किसी भी नदी में खड़े होकर जप करना चाहिए. इसमें किया गया जप शीघ्र लाभदायक होता है. जप का दशांश हवन करना चाहिए और ब्राह्मणों या गरीबों को भोजन कराना चाहिए.

* यंत्र साधना : यंत्र साधना सबसे सरल है. बस यंत्र लाकर और उसे सिद्ध करके घर में रखने पर  अपने आप कार्य सफल होते जायेंगे. यंत्र साधना को कवच साधना भी कहते हैं. यंत्र को दो प्रकार से बनाया जाता है - अंक द्वारा और मंत्र द्वारा. यंत्र साधना में अधिकांशत: अंकों से संबंधित यंत्र अधिक प्रचलित हैं. श्रीयंत्र, घंटाकर्ण यंत्र आदि अनेक यंत्र ऐसे भी हैं जिनकी रचना में मंत्रों का भी प्रयोग होता है और ये बनाने में अति क्लिष्ट होते हैं.
इस साधना के अंतर्गत कागज अथवा भोजपत्र या धातु पत्र पर विशिष्ट स्याही से या किसी अन्यान्य साधनों के द्वारा आकृति, चित्र या संख्याएं बनायी जाती हैं. इस आकृति की पूजा की जाती है अथवा एक निश्चित संख्या तक उसे बार-बार बनाया जाता है. इन्हें बनाने के लिए विशिष्ट विधि, मुहूर्त और अतिरिक्त दक्षता की आवश्यकता होती है.
यंत्र या कवच भी सभी तरह की मनोकामना पूर्ति के लिए बनाये जाते हैं  जैसे वशीकरण, सम्मोहन या आकर्षण, धन अर्जन, सफलता, शत्रु निवारण, भूत बाधा निवारण, होनी-अनहोनी से बचाव आदि के लिए यंत्र या कवच बनाये जाते हैं.

* दिशा: प्रत्येक यंत्र की दिशाएं निर्धारित होती हैं. धन प्राप्ति से संबंधित यंत्र या कवच पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके रखे जाते हैं तो सुख-शांति से संबंधित यंत्र या कवच पूर्व दिशा की ओर मुंह करके रख जाते हैं. वशीकरण, सम्मोहन या आकर्षण के यंत्र या कवच उत्तर दिशा की ओर मुंह करके, तो शत्रु बाधा निवारण या क्रूर कर्म से संबंधित यंत्र या कवच दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके रखे जाते हैं. इन्हें बनाते या लिखते वक्त भी दिशाओं का ध्यान रखा जाता है.

* योग साधना : सभी साधनाओं में श्रेष्ठ मानी गयी है योग साधना. यह शुद्ध, सात्विक और प्रायोगिक है. इसके परिणाम भी तुरंत और स्थायी महत्व के होते हैं. योग कहता है कि चित्त वृत्तियों का निरोध होने से ही सिद्धि या समाधि प्राप्त की जा सकती है.  योगिश्चत्तवृत्तिनिरोध:
मन, मस्तिष्क और चित्त के प्रति जाग्रत रहकर योग साधना से भाव, इच्छा, कर्म और विचार का अतिक्रमण किया जाता है. इसके लिए यम, नियम, आसन, प्राणायाम और प्रत्याहार ये 5 योग को प्राथमिक रूप से किया जाता है. उक्त 5 में अभ्यस्त होने के बाद धारणा और ध्यान स्वत: ही घटित होने लगते हैं. योग साधना द्वारा अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति की जाती है. सिद्धियों के प्राप्त करने के बाद व्यक्ति अपनी सभी तरह की मनोकामना पूर्ण कर सकता है.

* जब सिद्धियों के सबसे करीब होते हैं साधक
दीपावली की रात विधिपूर्वक भोजपत्र, रजत, स्वर्ण या ताम्रपत्र पर निम्न यंत्र बनाकर मंत्र का जप करने से अभीष्ट सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं. कार्तिक अमावस्या की रात का सिद्धि के लिए विशेष महत्व है. इस कार्य के लिए निश्चित काल या अर्धरात्रि में स्थिर लग्न में निम्न यंत्रों की सिद्धि की जा सकती हैं. कहते हैं, कार्तिक अमावस्या की रात में समस्त किस्म की सिद्धियां साधकों के सबसे करीब होती हैं, बशर्ते उन्हें विधिवत सिद्ध किया जाये.
इस दिन श्री लक्ष्मी जी का विधिपूर्वक पूजन कर कमलगट्टे की माला से निष्ठापूर्वक नीचे दिये गये मंत्र का 11 या 21 हजार बार जप कर दशमांश हवन व उसके पश्चात कन्याओं को भोजन कराने से श्री लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होती है - ऊं श्रीं ह्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्री ऊं महालक्ष्म्यै नम:. लक्ष्मी प्राप्ति हेतु मंत्र: ऊं ह्रीं श्री घंटाकर्णी नमोस्तुते ठ: ठ: ठ: स्वाहा. या ऊं लक्ष्मी वं श्री कमला धारं स्वाहा. यह घंटाकर्ण लक्ष्मी प्राप्ति का मंत्र है. इस मंत्र का 11 माला जप नियमित रूप से करने से लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है. घंटाकर्ण लक्ष्मी की पूजा लाल फूल, लड्डू, नारियल आदि से की जाती है.

लक्ष्मी चामर मंत्र: ऊं ह्रीं महालक्ष्मी ऊं ह्रीं. इस मंत्र का केवल पांच माला जप नियमति रूप से करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है. श्रीयंत्र, कुबेर यंत्र अथवा बीसा यंत्र का पंचामृत स्नान आदि कराकर पूजन करना चाहिए. फिर नीचे दिये गये मंत्र का 21 हजार या सवा लाख जाप करना चाहिए. इससे श्री गणेश व लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है- ऊं नमो विघ्न राजाय सर्व सौख्य प्रदायिने, दुष्टारिष्ट विनाशाय पराय परात्मने.लंबोदरं महावीर्यम् नागयज्ञोप शोभितम्. अर्धचंद्र धरं देवं विघ्न व्यूह विनाशनम्. ऊं ह्रां ह्रीं ह्रैं ह्रौं ह्र: हेरम्बाय नमोनम:. सर्विसद्धि प्रदोसि त्वं सिद्धि-बुद्धि प्रदोभव:. चिंतितार्थ प्रवस्विहसततं मोदक प्रिय:. सिंदूरारूणवरभ्रैश्च पूजितो वरदायकम्. इह गणपति स्तोत्र च पठेद भिक्त भाव नर:. तस्यदेहं च गेहं च स्वयं लक्ष्मीर्न मूच्चित.
दीपावली पर यह मंत्र सिद्ध कर रोज एक माला जप करने से धन, स्वास्थ्य व सुयश की प्राप्ति होती है. बेरोजगारों को रोजगार मिलता है और व्यापारियों को व्यापार में लाभ होता है. कुबेर यंत्र व श्री कुबेर जी का इस रात्रि विधिवत पूजन तथा निम्न मंत्र का 11 या 21 हजार अथवा सवा लाख जपकर, फिर प्रतिदिन नियमानुसार जप करने से आर्थिक स्थिति में सुधार  होता है : ऊं श्रीं ऊं श्रीं क्लीं श्रीं क्लीं विश्रेश्वराय नम:.

* कनकधारा यंत्र: कनकधारा यंत्र का नियमानुसार पूजन कर कनकधारा स्तोत्र व मंगल ऋणहर्श्रा स्तोत्र का पाठ करने से दुर्गा माता की कृपा से धन की चिंता दूर होती है या कर्ज से मुक्ति मिल जाती है. साथ ही उधार दिया गया धन भी मिल जाता है.

* पुत्र-प्राप्ति यंत्र : इस यंत्र का पूजन व संतानप्रद गणपति स्तोत्र या संतान गोपाल मंत्र का जप व हरिवंश पुराण का पाठ करने से मनोनुकूल संतान की प्राप्ति होती है.

* प्रेतबाधा निवारण यंत्र : इस यंत्र के साथ हनुमान जी या भैरव जी का पूजन कर हनुमत कवच तथा बटुक भैरव स्तोत्र का पाठ करने से भूत-प्रेत आदि से मुक्ति मिलती है. संकट, ज्वर, ग्रह व शत्रु कष्ट निवारण यंत्र इस यंत्र का पूजन कर महामृत्युजंय मंत्र का जाप, संकटनाशन गणोश स्तोत्र और श्रीसूक्त का पाठ करने से अभीष्ट की सिद्धि हो सकती है.

* मामले-मुकदमे में जीत के लिए : दिवाली की रात इस यंत्र को भोजपत्र पर नीम की कलम से लिखकर धूप, दीप, गंधादि से पूजना चाहिए. इसके पश्चात निम्नलिखित मंत्र का 31 माला जप करने से मंत्र सिद्ध हो जाता है.
मंत्र: ऊं नीली-नीली-महानीली (शत्रु पक्ष/जज का नाम) जीभि तालू सर्व खिली, सही खिलो तत्क्षणाय स्वाहा.

* धनप्रदाता सिद्ध बीसा यंत्र : दीपावली की रात को इस यंत्र को चांदी या स्वर्ण के पत्र पर उत्कीर्ण करवा कर धूप, दीप, अक्षत गंध आदि से इसकी पूजा करनी चाहिए. फिर महालक्ष्मी और गणोश को लड्डुओं का भोग लगाना चाहिए और लाल फूलों से उसे पूजना चाहिए. फिर निम्नलिखित मंत्र की 21 मालाएं जप कर यंत्र को तिजोरी में रख देना चाहिए. 21 दिन लगातार देसी घी का दीपक श्रीं महालक्ष्मी के सामने जलाना चाहिए. अगर यंत्र को जेब में रखना हो, तो उसे भोजपत्र पर बनाना चाहिए.
मंत्र: ऊं  ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय-पूरय चिंतायै दूरय-दूरय स्वाहा.

* सेवक वशीकरण पिशाच यंत्र : धनी लोगों को उनके सगे संबंधी, नौकर, सेवक आदि हर प्रकार की हानि पहुंचाने की चेष्टा करते हैं, ताकि धन हड़प सकें. अगर किसी धनी व्यापारी को किसी पर भी ऐसा संदेह हो, तो दिवाली, सूर्य-ग्रहण आदि में इस यंत्र को भोजपत्र पर अनार की कलम, अष्टगंध या गोरोचन से बना लें और पूजा करने के उपरांत दही में डालकर रख दें. यूं वह व्यक्ति कोई हानि नहीं पहुंचायेगा और सदा आज्ञा पालन करेगा.

* श्रीनारायण बीसा यंत्र : नरक चौदस या दिवाली को प्रात:काल कुश के आसन पर बैठकर भोज पत्र पर तुलसी की कलम या सोने अथवा चांदी के शलाका से केसर युक्त चंदन की स्याही से श्री नारायण बीसा यंत्र की रचना करें. शुद्ध घी के आठ दीपक जलाकर यंत्र को आठ पुष्प अर्पित करें. यंत्र पूजन के पश्चात पुत्र प्राप्ति ऊं नमो नारायणाय मंत्र की आठ माला जप करें. फिर यथाशक्ति श्री विष्णु सहस्रनाम या पुरुषसूक्त का एक पाठ करें. इस विधि से सिद्ध श्री नारायण बीसा यंत्र को घर की तिजोरी, दुकान या फैक्टरी के गल्ले में रखें अथवा ताबीज में भरकर गले में धारण करें. श्री नारायण बीसा यंत्र के प्रयोग से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. श्री विष्णु की प्रसन्नता से घर में श्री लक्ष्मी का वास स्वत: हो जाता है. यंत्र प्रभाव से शत्रुभय व रोगादि का निवारण होता है और जीवन समृद्ध हो जाता है.

* कुबेर बीसा यंत्र : दीपावली के दिन प्रदोष काल में यह यंत्र घी और सिंदूर मिलाकर व्यापार स्थल की दीवार पर (पूर्व या उत्तर दिशा में) श्री धनाध्यक्षाय नम: का उच्चारण करते हुए बनाएं. फिर पुष्प, चंदन, धूप और दीप से इसका पूजन करें. प्रतिदिन इस यंत्र का पूजन करके व्यापार प्रारंभ करने से व्यापार में वृद्धि और धनलाभ होता है.
ऋण से मुक्ति हेतु दिवाली की रात में एक लाल अथवा नारंगी रंग के कागज पर रक्त चंदन तथा रोली के घोल व चमेली की कलम से यह यंत्र अंकित कर लें. अब गणपति जी के भव्य रूप का ध्यान करते हुए उनकी धूप, दीप तथा रक्त पुष्प से पूजा-अर्चना करें. फिर गणपति जी को दूब चढ़ायें. गणपति जी को दूब चढ़ाने का विशेष महत्व है. अंत में उक्त यंत्र भी गणपति जी के चरणों में अर्पित करके श्री गजानन, जय गजानन मंत्र की एक माला का जाप करें. पूजा की समाप्ति के बाद यंत्र को मोड़कर तांबे के ताबीज में बंद कर लें तथा इसे सदा अपने पास रखें. उक्त मंत्र की नित्य एक माला जपकर गणपति जी से कर्ज मुक्ति की प्रार्थना श्रद्धाभाव से करते रहें. कोई भी निष्ठावान व्यक्ति इस प्रयोग से लाभ उठा सकता है.

* धनदा यक्षिणी यंत्र : धनतेरस के दिन संभव हो, तो एक दक्षिणावर्ती शंख खरीद लें. शंख ना हो, तो किसी धातु का एक पात्र रख लें. काठ के पटरे पर अथवा घर में उपलब्ध किसी स्वच्छ थाली में हल्दी के घोल से रतिप्रिया धनदा यक्षिणी यंत्र चित्रनुसार अंकित कर लें. उस पर उक्त शंख पात्र को स्थापित कर दें. शंख का पूंछ वाला अर्थात नुकीला भाग सदैव उत्तर-पूरब दिशा में रहना चाहिए. धनतेरस से दीपावली तक एक समय निश्चित करके निम्न दो मंत्रों में से एक अथवा दोनों मंत्रों की 11 माला का जाप नित्य करें : 1. ऊं  श्री महालक्ष्म्यै नम: 2. ऊं श्री लक्ष्मीनारायणाभ्यां नम: हर जप के बाद नागकेसर मिश्रित चावल थोड़े-थोड़े करके शंख अथवा पात्र में छोड़ें. अगले दो दिन इन्हीं चावलों को पुन: 11 माला जप कर शंख में छोड़ें. दिवाली की पूजा में इस शंख को रख पूजा कर लें और फिर पूजा अथवा कार्य स्थल पर किसी शुद्ध स्थान पर रख दें. इसमें श्रीफल, एक कौड़ी तथा चांदी का एक सिक्का रखकर लाल कपड़े से ढ़क दें. नित्य मंत्र का जाप करते रहें. पूरे वर्ष लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी.
दिवाली पूजा में रखा चांदी का सिक्का भी इस शंख अथवा पात्र में स्थापित कर सकते हैं. एक अन्य यंत्र दिवाली को हनुमान जी पर चढ़ने वाला सिंदूर व गाय का शुद्ध घी लेकर घोल बना लें. इस घोल से अपने कार्य स्थल, पूजा स्थलादि की उत्तर अथवा पूरब मुखी दीवार पर साथ दिया यंत्र अंकित कर लें. यदि दुकान आदि में मूल्यवान सामग्री की कोई अलमारी अथवा तिजोरी हो, तो उसके पृष्ठ भाग में भी यह यंत्र अंकित कर सकते हैं.



नोट:- जन्मकुंडली  बनवाने के लिए संपर्क करे !
:>असली राशि रत्न,रुद्राक्ष,माला,यंत्र,कवच,वास्तु सामग्री सर्टिफिकेट वस्तु  उचित दर में उपलब्ध
संपर्क सूत्र:- 8619902445
 whatsapp and paytm no.-9462012134


लघु रुद्राभिषेक

लघु रुद्राभिषेक पूजा विधि                          लघु रूद्र पूजा (Rudrabhishek) का सामान्य सा अर्थ यही होता है कि शिव की ऐसी पूजा जो व्यक्त...