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मंगलवार, 7 मई 2019

सर्वोन्नती प्राप्ती परशुराम साधना


         सर्वोन्नती प्राप्ती परशुराम साधना

 

हर मनुष्य की कुछ मनोकामनाएं होती है। कुछ लोग इन मनोकामनाओं को बता देते हैं तो कुछ नहीं बताते। चाहते सभी हैं कि किसी भी तरह उनकी मनोकामना पूरी हो जाए। लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। यदि आप चाहते हैं कि आपकी सोची हर मुराद पूरी हो जाए तो नीचे लिखे प्रयोग करें। इन टोटकों को करने से आपकी हर मनोकामना पूरी हो जाएगी।सभी चाहते हैं कि उसके जीवन में खुशहाली रहे और सुख-शांति बनी रहे पर हर व्यक्ति के साथ ऐसा नहीं होता। जीवन में सुख और शांति का बना रहना काफी मुश्किल होता है। ऐसे समय में उसे अपना जीवन नरक लगने लगता है। यदि आपके साथ भी यही समस्या है तो आप नीचे लिखे साधारण उपायों को अपना कर अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं।
भगवान विष्णु के दशावतार में छठे अवतार भगवान परशुराम माने जाते हैं। क्रोध और दानशीलता में उनका कोई सानी नहीं है। शस्त्र और शास्त्र के ज्ञाता सिर्फ और सिर्फ भगवान परशुराम ही माने जाते हैं। भगवान शिव ने उन्हें मृत्युलोक के कल्याणार्थ परशु अस्त्र प्रदान किया जिससे वे परशुराम
कहलाए। वे परम शिवभक्त थे। उन्होंने सहस्रार्जुन की इहलीला समाप्त कर दी। प्रायश्चित के लिए सभी तीर्थों में तपस्या की। गणेशजी को एकदंत करने वाले भी परशुराम थे। पृथ्वी को 17 बार क्षत्रियों से
विहीन करने वाले भगवान परशुराम ही
थे। उनकी दानशीलता ऐसी थी कि समस्त पृथ्वी ही ऋषि कश्यप को दान कर दी।
उनके शिष्यत्व का लाभ दानवीर कर्ण ही ले पाए जिसे उन्होंने ब्रह्मास्त्र की दीक्षा ‍दी। भगवान परशुराम की सेवा-साधना करने वाले भक्त भूमि, धन, ज्ञान, अभीष्ट
सिद्धि, दारिद्रय से मुक्ति, शत्रु नाश, संतान प्राप्ति, विवाह, वर्षा, वाक् सिद्धि इत्यादि पाते हैं। महामारी से रक्षा कर सकते हैं l किसी भी तृतीया के दिन सर्वकामना की सिद्धि हेतु भगवान परशुराम के मंत्र का जाप करना चाहिए।
साधना विधी:साधना मे सर्वप्रथम गणेश/गुरू पुजन करे,सामने भगवान परशुराम जी का चित्र स्थापित करके पुष्प चढाते हुए अपनी कामना बोलिये साथ मे रुद्राक्ष माला से शिव मंत्र का एक माला जाप करे "ओम ह्रौं अस्त्रप्रदाय शिवायै नम" l साधना हेतु वस्त्र-आसन सफेद/पिले रंग के हो,दिशा पूर्व/उत्तर हो,दीपक घी का हो,धूप भी जलाये और दिए हुए मंत्र का 11 माला जाप सुबहा के समय मे 11 दिनो तक अवश्य करे तो पूर्ण लाभ संभव है l


रोज साधना मे अवश्य भगवान की स्तुती करिये.
भगवान परशुराम स्तुति:-
प्रात: काले तु उत्थाय, स्मरामि रेणुका
सुतम् जितेन्द्रयं वेद वेतारं दुष्ट् संहारकारकम्। पित्राज्ञा पालकं चैव, कार्त वीये मदा पहम्। हैहयानां कुलान्तकं, शत वारम् नमाभ्याहम्। विप्राय भृगुनाथाय, चिर जीवाय वाचसा। पुरत: चतुर्वेदाय, नम: धनुर्धराय च। परशुरामाय रामाय, जामदग्न्याय तापसे। ब्रह्म देवाय देवाय, रेणुका सूनवे नम:। दारिद्र दु:खहन्तारं दातारं सुख सम्पदाम्। परशुरामं महावीरं, भूयो भूयो नमाभ्याहम्।



निम्न श्लोक का भी 11 बार पाठ करे-
भृगुदेव कुलं भानुं, सहस्रबाहुर्मर्दनम्।
रेणुका नयनानंदं, परशुं वन्दे विप्रधनम्।।


परशुराम मंत्र:-
ll ओम रां रां परशुरामाय सर्व सिद्धी प्रदाय नम: ll
om raam raam parashuraamaay sarva siddhi pradaay namah

मंत्र जाप के बाद एक बार श्री परशुराम चालिसा का पाठ अवश्य करे.

दोहा
श्री गुरु चरण सरोज छवि, निज मन मन्दिर
धारि।
सुमरि गजानन शारदा, गहि आशिष
त्रिपुरारि।।
बुद्धिहीन जन जानिये, अवगुणों का
भण्डार।
बरणौं परशुराम सुयश, निज मति के
अनुसार।।
चौपाई
जय प्रभु परशुराम सुख सागर, जय मुनीश गुण ज्ञान दिवाकर।
भृगुकुल मुकुट बिकट रणधीरा, क्षत्रिय तेज मुख संत शरीरा।
जमदग्नी सुत रेणुका जाया, तेज प्रताप सकल जग छाया।
मास बैसाख सित पच्छ उदारा, तृतीया
पुनर्वसु मनुहारा।
प्रहर प्रथम निशा शीत न घामा, तिथि
प्रदोष व्यापि सुखधामा।
तब ऋषि कुटीर रुदन शिशु कीन्हा, रेणुका
कोखि जनम हरि लीन्हा।
निज घर उच्च ग्रह छः ठाढ़े, मिथुन राशि
राहु सुख गाढ़े।
तेज-ज्ञान मिल नर तनु धारा, जमदग्नी घर
ब्रह्म अवतारा।
धरा राम शिशु पावन नामा, नाम जपत लग लह विश्रामा।
भाल त्रिपुण्ड जटा सिर सुन्दर, कांधे मूंज
जनेऊ मनहर।
मंजु मेखला कठि मृगछाला, रुद्र माला बर
वक्ष विशाला।
पीत बसन सुन्दर तुन सोहें, कंध तुरीण धनुष मन मोहें।
वेद-पुराण-श्रुति-स्मृति ज्ञाता, क्रोध रूप
तुम जग विख्याता।
दायें हाथ श्रीपरसु उठावा, वेद-संहिता
बायें सुहावा।
विद्यावान गुण ज्ञान अपारा, शास्त्र-
शस्त्र दोउ पर अधिकारा।
भुवन चारिदस अरु नवखंडा, चहुं दिशि सुयश प्रताप प्रचंडा।
एक बार गणपति के संगा, जूझे भृगुकुल कमल पतंगा।
दांत तोड़ रण कीन्ह विरामा, एक दन्द
गणपति भयो नामा।
कार्तवीर्य अर्जुन भूपाला, सहस्रबाहु दुर्जन
विकराला।
सुरगऊ लखि जमदग्नी पाही, रहिहहुं निज
घर ठानि मन माहीं।
मिली न मांगि तब कीन्ह लड़ाई, भयो
पराजित जगत हंसाई।
तन खल हृदय भई रिस गाढ़ी, रिपुता मुनि
सौं अतिसय बाढ़ी।
ऋषिवर रहे ध्यान लवलीना, निन्ह पर
शक्तिघात नृप कीन्हा।
लगत शक्ति जमदग्नी निपाता, मनहुं
क्षत्रिकुल बाम विधाता।
पितु-बध मातु-रुदन सुनि भारा, भा अति
क्रोध मन शोक अपारा।
कर गहि तीक्षण परा कराला, दुष्ट हनन
कीन्हेउ तत्काला।
क्षत्रिय रुधिर पितु तर्पण कीन्हा, पितु-
बध प्रतिशोध सुत लीन्हा।
इक्कीस बार भू क्षत्रिय बिहीनी, छीन
धरा बिप्रन्ह कहँ दीनी।
जुग त्रेता कर चरित सुहाई, शिव-धनु भंग
कीन्ह रघुराई।
गुरु धनु भंजक रिपु करि जाना, तब समूल नाश ताहि ठाना।
कर जोरि तब राम रघुराई, विनय कीन्ही
पुनि शक्ति दिखाई।
भीष्म द्रोण कर्ण बलवन्ता, भये शिष्य
द्वापर महँ अनन्ता।
शस्त्र विद्या देह सुयश कमावा, गुरु प्रताप
दिगन्त फिरावा।
चारों युग तव महिमा गाई, सुर मुनि मनुज
दनुज समुदाई।
दे कश्यप सों संपदा भाई, तप कीन्हा महेन्द्र
गिरि जाई।
अब लौं लीन समाधि नाथा, सकल लोक
नावइ नित माथा।
चारों वर्ण एक सम जाना, समदर्शी प्रभु तुम
भगवाना।
लहहिं चारि फल शरण तुम्हारी, देव दनुज नर भूप भिखारी।
जो यह पढ़ै श्री परशु चालीसा, तिन्ह
अनुकूल सदा गौरीसा।
पूर्णेन्दु निसि बासर स्वामी, बसहुं हृदय प्रभु
अन्तरयामी।
दोहा
परशुराम को चारु चरित, मेटत सकल
अज्ञान।
शरण पड़े को देत प्रभु, सदा सुयश सम्मान।।




आदेश......

शनिवार, 15 दिसंबर 2018

सुनेहला रत्न के लाभ – पुखराज का उपरत्‍न


सुनेहला रत्न के लाभ – पुखराज के उपरत्‍न बारे में नहीं जानते होंगे आप ये सब बातें
सुनेहला रत्न पीले रंग का नरम तथा पूर्ण पारदर्शक रत्न होता है। यह पुखराज का उपरत्‍न है और पुखराज गुरु ग्रह का रत्न है इसलिए इसे पहनने से गुरू से संबंधित सभी लाभ मिलते हैं, मान-सम्‍मान की प्राप्‍ति होती है, निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है और सामाजि‍क कार्यों में रूचि बढ़ती है।
sunehla-gemstone-benefits
सुनेहला रत्न के लाभ
धन में वृद्धि – आर्थिक तंगी का सामना कर रहे जातकों के लिए यह रत्न धारण करना बहुत ही लाभदायक होता है, यह रत्न धारण करने के बाद रुपए-पैसे से संबंधित सभी प्रकार की दिक्कते अपने आप समाप्त होने लगती है तथा घर में खुशहाली आती है।
मानसिक तनाव दूर होता है – आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर एक व्यक्ति मानसिक तनाव से गुजर रहा है, यही तनाव हमारे आर्थिक, शारीरिक और गृहस्थ जीवन पर अपना नकारात्मक प्रभाव डालता है। अगर ऐसी स्थिति से आप गुजर रहे है और मानसिक तनाव से छुटकारा पाना चाहते हो तो तुरंत सुनेहला धारण करे, लाभ अवश्य होगा।
उच्च शिक्षा में सहायक – हम सभी जानते है की जीवन में शिक्षा का कितना महत्व है, अगर आपको शिक्षा ग्रहण करने में किसी भी तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ रहा हो या उच्च शिक्षा प्राप्ति में अडचने आ रही हो या पढाई में मन नहीं लग रहा हो या एकाग्रता की कमी महसूस हो रही हो तो बिना सोचे समझे तुरंत आप सुनेहला रत्न धारण कीजिये इसका शीघ्र ही शुभ फल आपको देखने को मिलेगा।
Rashi Gem Stones
लिवर और शुगर को कंट्रोल करता है – जो व्यक्ति लम्बे समय से लिवर से सम्बंधित बीमारी से ग्रस्त है, इलाज के बाद भी आराम नहीं मिल रहा हो उस व्यक्ति को यह रत्न अवश्य धारण करना चाहिए इसके अलावा जो व्यक्ति मधुमेह जैसी बीमारी से पीड़ित है या शुगर कंट्रोल में नहीं आ रही हो तो तुरंत सुनेहला रत्न धारण करना चाहिए लिवर और मधुमेह से सम्बंधित सभी दिक्कते आपने आप कम हो जायेंगी, इसलिए समय व्यर्थ न करते हुए सुनेहला रत्न अवश्य धारण करना चाहिए।
sunela gemstone
किस राशि के जातक धारण करें?
वैदिक ज्‍योतिष के अनुसार सुनेहला रत्न गुरू से संबंधित है और यह धनु और मीन पर अधिकार रखता है इसलिए धनु और मीन राशि के जातकों के लिए यह रत्न लाभकारी होता है। पश्चिमी ज्‍योतिष के अनुसार यह धनु राशि वालों का बर्थ स्‍टोन है।
कहाँ से प्राप्‍त करें
श्री कालिका ज्योतिष केन्द्र अच्‍छे, प्राकृतिक और सिद्ध रत्‍न उन लोगों को पहुंचाने के उद्देश्‍य से ही काम कर रही है जिसे उनकी जरूरत है। हमारी पहली प्राथमिकता है कि जिसको रत्‍नों की जरूरत है उसको उसकी आवश्‍यकता और क्षमता के अनुसार बेहतर रत्‍न उपलब्‍ध कराया जाए। हम अच्‍छे, सर्टिफाइड और सस्‍ते रत्‍न लोगों तक पहुंचाते हैं जिससे सभी रत्‍नों के जादुई असर से अपना जीवन संवार सके। सेंथेटिक सुनेहला भी बाजार में बहुत अधिक मात्रा में है लेकिन ज्‍योतिष रेमिडी के लिए इसे श्रीकालिका ज्योतिष केन्द्र से ही लेना उचित है।
सुनेहला खरीदते समय सावधान रहना चाहिए क्‍योंकि जामुनिया को आग पर जला कर तैयार सुनेला जैसा पत्‍थर रत्‍न के रूप में बाजार में उपलब्‍ध है। अमेरिका, ब्राजील और साउथ अफ्रीका इसके बड़े उत्‍पादक है। रत्‍नों और जेम स्‍टोन के बढ़ते चलन के कारण हर ज्‍वेलर के पास यह रत्‍न मिल जाएगा लेकिन यह जरूरी नहीं हो कि वह प्राकृतिक हो क्‍योंकि लगभग सभी जेमस्‍टोन के सेन्‍थेटिक रूप तैयार किए जा सके हैं।
हमसे क्‍यों लें
इस रत्न को हमारे श्री कालिका ज्योतिष केंद्र के अनुभवी ज्योतिषी पंडित कृष्णा जोशी जी द्वारा अभिमंत्रित किया है जिससे यह आपको जल्‍द ही शुभ फल दे। इस रत्न के साथ सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा जो इस रत्‍न के ओरिजनल होने का प्रमाण है।
किसी भी जानकारी के लिए Call करें
94620-12134

सोमवार, 24 सितंबर 2018

राशि के अनुसार रत्न पहने

https://youtu.be/Ol6kwlzLH98               राशि के अनुसार रत्न पहने

राशि और उससे जुड़ा रत्न
किस राशि का कौनसा रत्न होता है | ग्रहों के बुरे प्रभाव के कारण मनुष्‍य को जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वैसे तो ग्रहों की शांति के लिए कई उपाय बताए गए हैं लेकिन इस समस्‍या का चमत्‍कारिक हल रत्‍न द्वारा भी किया जा सकता है। हर राशि का अलग-अलग स्‍वभाव होता है वैसे ही प्रत्‍येक रत्‍न का भी हर राशि पर भिन्‍न प्रभाव पड़ता है।

राशि और उससे जुड़े रत्न

मेष राशि रत्न

मेष राशि के जातक अत्‍यंत क्रोधी स्‍वभाव के होते हैं। इससे प्रभावित जातक छोटी-छोटी बातों पर भी उतेजित हो जाते हैं। ये जिद्दी स्‍वभाव के भी होते हैं। मेष रा‍शि के जातकों को मूंगा अथवा गारनेट रत्‍न धारण करने से फायदा होता है। इस रत्‍न के प्रभाव में जातक का दिमाग शांत रहता है।

वृषभ राशि रत्न

वैसे तो वृषभ राशि के जातक धैर्यवान होते हैं लेकिन इनमें भावुकता की अधिकता होती है। स्‍वभाव से अत्‍यधिक भावुक होना ही इन जातकों की सबसे बड़ी कमी मानी जाती है। ये लोग किसी पर भी जल्‍दी भरोसा कर लेते हैं। इसलिए वृषभ राशि के जातकों को हीरा धारण करना चाहिए। हीरे के प्रभाव से वृषभ राशि के जातक बुरी संगत से दूर रहेंगें|

मिथुन राशि रत्न

मिथुन राशि के जातक आकर्षक और कला के प्रेमी होते हैं। इनका नेगेटिव प्‍वाइंट होता है कि इन्‍हें जीवन में सफलता ज़रा देर से मिलती है। यदि मिथुन राशि के जातक पन्ना धारण करें तो उसे अपने जीवन में सफलता प्राप्‍ति में सहयोग मिलता है।

कर्क राशि रत्न

कर्क राशि के जातक बुद्धिमान होते हैं लेकिन यह हठी स्‍वभाव के भी होते हैं। अपने जिद्दी स्‍वभाव के कारण कभी-कभी इन्‍हें नुकसान भी उठाना पड़ जाता है। कर्क राशि के जातकों को मोती पहनने से लाभ होता है। यह रत्‍न मन के विचारों को नियंत्रित कर उसे शांति प्रदान करता है।

सिंह राशि रत्न

सिंह राशि के जातक काफी उदार होते हैं लेकिन इन्‍हें अपने जीवन में काफी संघर्ष करना पड़ता है। छोटी-छोटी चीजें भी इन्‍हें काफी मेहनत के बाद नसीब होती हैं। ऐसे में अगर सिंह राशि के जातक माणिक्‍य, रेड ओपल या गारनेट धारण करें तो उन्‍हें अपने कार्यों में सफलता हासिल होती है।

कन्‍या राशि रत्न

जीवन में आई कठिनाइयों से निपटना कन्‍या राशि के जातक अच्‍छी तरह से जानते हैं। इन जातकों में कमी होती है कि यह काफी भावुक प्रवृत्ति के होते हैं। दूसरों के प्रति जल्‍दी आकर्षित हो जाते हैं। इनका चंचल स्‍वभाव ही इनकी सबसे बड़ी मुसीबत बन जाता है। अत: कन्‍या राशि के जातकों को पन्‍ना रत्‍न धारण करना चाहिए।

तुला राशि रत्न

तुला राशि के जातकों में विभिन्‍न खूबियां होती हैं। इन्‍हें कला से प्रेम होता है एवं पैसा कमाने के लिए ये सदैव उत्‍सुक रहते हैं। लेकिन ये जातक हमेशा दूसरों पर अपना वर्चस्‍व साबित करना चाहते हैं। ये काफी स्‍वार्थी भी होते हैं। अपनी नकारात्‍मकता को नियंत्रित करने के लिए तुला राशि के जातक ओपल, ब्‍लू डायमंड और टोपाज धारण कर सकते हैं।

वृश्चिक राशि रत्न

धैर्य और शांति का दूसरा नाम होते हैं वृश्चिक राशि के जातक। इन जातकों को जीवन में सफलता पाने के लिए जीतोड़ मेहनत करनी पड़ती है। खूब पसीना बहाने के बाद ही कामयाबी इनके हाथ आती है। यदि वृश्चिक राशि के जातक मूंगा धारण करें तो इनके द्वारा किए गए प्रयासों से जल्‍दी सफलता पाई जा सकती है। मूंगा के प्रभाव में ये जातक अपने लक्ष्‍य को प्राप्‍त कर पाएंगें।

धनु राशि रत्न

धनु राशि के जातक दिखने में मजबूत और शक्तिशाली होते हैं। कार्य को तेजी से करते हैं लेकिन कार्य पूरा किए बिना दूसरों के ऊपर कार्य सौंप कर उस काम से हट जाते हैं। इस राशि के जातकों को पुखराज धारण करना शुभ होगा यह उनके भाग्य की वृद्धि में सहायक होगा।

मकर राशि रत्न

मकर राशि के जातक सदा दूसरों की सहायता के लिए तत्‍पर रहते हैं। इन जातकों के जीवन में परिश्रम और चिंता अधिक होती है। परिवार से भी इन्‍हें सहयोग नहीं मिल पाता। इनका भाग्य देर से जागता है इसलिए मेहनत का फल भी देर से मिलता है। मकर राशि का स्‍वामी शनि ग्रह है इस‍लिए मकर राशि वाले जातकों को नीलम रत्‍न धारण करना चाहिए।

कुंभ राशि रत्न

ये जातक ज्ञान का भंडार होते हैं। लेकिन इनका आत्‍मविश्‍वास काफी कमजोर होता है। ये शारीरिक रूप से भी कमजोर होते हैं। इस राशि का शुभ रत्‍न नीलम है।

मीन राशि रत्न

मीन राशि के जातक जीवन के प्रति काफी उत्‍साहित रहते हैं। इनका स्‍वास्‍थ्‍य ज्‍यादा अच्‍छा नहीं रहता। इन्‍हें पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है। पुखराज इस राशि के लिए शुभ रत्‍न माना जाता है |

                          "जय माता दी"
                      "जय शमशान भैरव"

💯%असली राशि रत्न💎लेब टेस्टेड🔬,रुद्राक्ष,📿माला,🔯यंत्र,
🛡️कवच,🐴घोड़े की नाल,🚩वास्तु सामग्री
🥇☑️सर्टिफिकेट वस्तु  उचित दर💰में उपलब्ध👍

💎रत्न को नकली साबित करने वाले को 💰51 हजार रुपए का नगद ईनाम 👍
                   
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               📞संपर्क सूत्र:- 9462012134




लघु रुद्राभिषेक

लघु रुद्राभिषेक पूजा विधि                          लघु रूद्र पूजा (Rudrabhishek) का सामान्य सा अर्थ यही होता है कि शिव की ऐसी पूजा जो व्यक्त...